प्रेरणादायक कविता : नन्हा पौधा
सत्य, अहिंसा, परिश्रम,ज्ञान के रास्ते
एक नन्हा पौधा चल पड़ा था मुकाम पाने।
ज़ख्मी थे पैर गर जूनून उसका बुलंद था
टूटकर, थक कर भी वो निरंतर चलता था।
जब प्रतिद्वंदी उसके जड़ो में तेजाब डाल सुखाने आए
वो जड़ों को अपने ,ज्ञान से और फैलाता चला गया।
आसमां में घर बनाने के कई रास्ते थे मगर,
रिश्वत की ईंट नही वो मेहनत की ईंट लेकर चलता।
आंधी से घबराया नहीं वो, डटा रहा अपने आत्मविश्वास से,
कई शाखाओं, पत्तो को खो कर भी जीतने की राह बुनता रहा।
जितने बार उसे जिसने गिराना चाहा,
अपने हौसले से उठ खड़े होकर दिखाया।
निरंतर प्रयास और मेहनत से वो छू आसमां को,
आज सत्य की राह दिखा कर कई नन्हे पौधों की प्रेरणा बन रहा।
अपना बहुमूल्य समय देकर मेरी इस कविता को पढ़ने के लिए धन्यवाद। आपको यह कविता कैसी लगी हमे जरूर बताईएगा। ऐसे ही अन्य पोस्ट पढने के लिए हमारे साथ बने रहे।
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